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लालबहादुर शास्त्रीजी की संकल्प शक्ति Short Hindi Story of Lal Bahadur Shashtri

लालबहादुर शास्त्रीजी की संकल्प शक्ति

Short Hindi Story of Lal Bahadur Shashtri

लालबहादुर शास्त्रीजी की संकल्प शक्ति Short Hindi Story of Lal Bahadur Shashtri

लालबहादुर शास्त्रीजी की संकल्प शक्ति Short Hindi Story of Lal Bahadur Shashtri

सन – 1965 में जब अमेरिका ने भारत को गेहूं का निर्यात बंद कर दिया,

तो फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्रीजी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली की ।

उसमें वे बोले मेरे प्रिय देशवासियों, एक तरफ पड़ौसी देश से सीमा पर युद्ध चल रहा है,

वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने दबाव बनाने के लिये हमें गेहूं भेजना बंद कर दिया है।

 

हमने  अपने स्वाभिमान के लिये इस चुनौती को स्वीकार किया है। मैं देश के प्रत्येक नागरिक से निवेदन करता हूँ

कि वह फिजूल खर्च बंद कर दे व देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू बनाये रखने के लिये सप्ताह में एक दिन व्रत रखे।

फिर क्या था लोगों ने सप्ताह में एक दिन उपवास रखना आरम्भ कर दिया

 

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शास्त्रीजी भी हर सोमवार व्रत रखते थे उनकी पत्नी ललिता देवी प्रायः बीमार रहती थी

इसीलिए उनका घरेलू कार्य एक कामवाली बाई करती थी।

शास्त्रीजी ने उसे भी सेवा मुक्त कर दिया और घर का काम स्वयं करने लगे। वे अपने कपड़े स्वयं धोते थे।

उनके पास केवल दो जोड़ी धोती कुरता ही थे। एक दिन उनकी धोती कपड़े धोते वक्त फट गयी,

तो पत्नी बोली- आप नई धोती खरीद लाइये।

 

उन्होंने कहा- मैं नई धोती खरीदने की सोच भी नहीं सकता अच्छा होगा कि आप इसे सिल दे,

उनके घर बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिये एक अध्यापक भी आते थे।

शास्त्रीजी ने जब उससे भी ट्यूशन बंद करने के लिये कहा तब वह कहने लगा बच्चे तो अंग्रेजी में फेल हो जायेंगे ।

अतः शास्त्रीजी ने उसे समझाया कि हजारों बच्चे अंग्रेजी में फेल होते है। तब मेरे बच्चे भी फेल हो जायेंगे तो क्या !

अंग्रेजी में फेल होना स्वाभाविक भी है क्योंकि यह हमारी मात्र भाषा नहीं है । शास्त्रीजी का स्वाभाव ऐसा ही था।

वे जो कहते थे,  वह काम भी करते थे।

 

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