Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती ।। Hindi story of mathematician Bhaskaracharya

भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती ।। Hindi story of mathematician Bhaskaracharya

भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती ।। Hindi story of mathematician Bhaskaracharya

भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती ।। Hindi story of mathematician Bhaskaracharya

बहुत पुरानी बात है. एक गणितज्ञ थे जिनका नाम भास्कराचार्य था। उनकी पुत्री का नाम लीलावती था। विवाह के कुछ समय पश्चात उनकी पुत्री विधवा हो गई वह हमेशा दुखी रहती थी ।

भाष्कराचार्य ने जब अपनी पुत्री को इतना दुखी देखा तो वह उसे उसके ससुराल से अपने घर ले आये ।अपने घर आने के बाद भी लीलावती का वही हाल रहा वह सारा दिन अपने भाग्य को कोसती रहती थी और अपने भाग्य पर आंसू बहती रहती थी ।

एक दिन भास्कराचार्य ने लीलावती को समझाया- बेटी मुझे तुम्हारे दुःख का अंदाजा है। मैं तुम्हारा दुःख समझ सकता हूँ ,पर कब तक तुम इस तरह रोती रहोगी जो चला गया वो वापस तो नहीं आ सकता।

एक न एक दिन सभी को इस दुनिया से जाना है यदि तुम सारा दिन ऐसे ही रोती रही, तो धीरे धीरे तुम्हारे अस्तित्व का नाम निशान मिट जाएगा । तुम्हे इस दुःख से बाहर निकलना होगा और अपना समय व्यर्थ न गवाकर अपने व्यक्तित्व को सार्थक रूप देने का प्रयास करना चाहिए ।

तब लीलावती कुछ होश में आयीं और बोली पिताजी में क्या करूँ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। आप ही कोई रास्ता बताइये।

तब भाष्कराचार्य बोले – बेटी तुम प्रखर बुद्धि हो  अपना मन गणित सीखने में लगाओ यह तुम्हें तुम्हारे दुःख से बाहर निकलने में मदद करेगा तुम्हे जीने की नई दिशा मिलेगी ।

लीलावती को अपने पिता की बात अच्छी लगी , वे अपना समय गणित सीखने में लगाने लगीं । गणित में उनका मन कुछ इस तरह रम गया की वे अपना दुःख भी धीरे धीरे भूल गई ।
इसके बाद लीलावती हमेशा गणित की पहेलियों में खोई रहतीं उन्होंने गणित के कई नियम निर्धारित किये उनके बनाये नियम आज भी गणित में उपयोग किये जाते है। उन्होंने अंक गणित पर कई महान ग्रंथों की रचना की,अपने पिता को गणित सम्बन्धी शोध कामो में बहुत सहयोग किया ।
उनके पिता ने अपने एक ग्रन्थ का नाम लीलावती भी रखा। इस ग्रंथ ने भाष्कराचार्य और लीलावती को अमर कर दिया। इस प्रकार लीलावती ने यह सिद्ध कर दिया।

अगर इन्सान अपने दिमाग को अपने पसंद के कार्य में लगा दे, तो वह कठिन से कठिन दुःख से भी उबर सकता हे और अपनी एक पहचान
बना सकता है।

FOR VISIT MY YOUTUBE CHANNEL

CLICK HERE

Friends अगर आपको ये Post “भास्कराचार्य की पुत्री लीलावती ।। Hindi story of mathematician Bhaskaracharya” पसंद आई हो तो आप इसे Share कर सकते हैं.

कृपया Comment के माध्यम से हमें बताएं आपको ये पोस्ट कैसी लगी.

DoLafz की नयी पोस्ट ईमेल में प्राप्त करने के लिए Sign Up करें

Speak Your Mind

*