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द्रौपदी के कर्म फल की कहानी Motivational Hindi Story of Karma

द्रौपदी के कर्म फल की कहानी Motivational Hindi Story of Karma

द्रौपदी के कर्म फल की कहानी Motivational Hindi Story of Karma

द्रौपदी के कर्म फल की कहानी Motivational Hindi Story of Karma

एक बार की बात है । उस समय जब द्रौपदी सुबह के वक्त प्रातःकाल यमुना नदी के किनारे पर

स्नान करने के लिये नदी के घाट पर पहुंची। वहां उन्होंने दूर स्नान करते हुये एक साधू को देखा

वह गंगा नदी में स्नान कर रहा था| वह एक मात्र लंगोटी धारण किये  हुये था।

 

साधू ने जब स्नान कर लिया। तो  वह अपनी दूसरी लंगोटी लेने उस नदी के किनारे की ओर बढ़े

और तभी वहां अचानक एक तेज़ हवा का झोंका आया जिससे किनारे पर रखी दूसरी लंगोटी को हवा

अपने साथ उड़ा ले गयी।

 

जिससे वो नदी में गिर गयी और पानी का तेज़ वहाव आया और उस लंगोटी को अपने साथ बहा कर ले

गया। अचानक एक इत्तफाक हुआ और उनकी लंगोटी जो कि वह पहने हुये थे, वो भी फट गयी।

साधू सोचने लगे कि वे अपनी लाज कैसे बचाये।

 

थोड़ी ही देर में सूर्योदय होने को था और घाट पर भीड़ भी बढ़ने वाली थी साधू महात्मा को कुछ समझ

नहीं आया तो वे पानी से जल्दी बाहर निकले और झाड़ियों के बीच जाकर छिप गये। यह सब परेशानियाँ

द्रोपदी अपनी आँखों से देख रही थी।

 

वे तत्काल साधू के पास गयी और अपनी साड़ी को आधा फाड़कर साधू को दे दिया ।और बोली मुनिवर

आप परेशान नहीं हो। मैं आपकी परेशानी को  समझ चुकी हूँ ।आप इस वस्त्र से अपनी लाज आराम से

ढ़क सकते है।

 

संत ने संकोचवश वह कपड़ा ले लिया व उनको एक आशीर्वाद भी दिया। जिसतरह आज तुमने मेरी लाज

बचाई है उसी तरह प्रभू एक दिन आपकी लाज को सहारा देंगे। और जब वह समय आया जब भरी सभा में

उनका चीरहरण हुआ।

 

उस वक्त द्रोपदी की करुणामयी पुकार नारद जी ने भगवान तक पहुंचाई दी, तो भगवान बोले हे नारद कर्मों

के बदले मेरी कृपा बरसती है और नारद जी से पूंछा क्या कोई पुन्य हो द्रोपदी के खाते में जब इस बात की

जांच की गयी।

 

उस दिन संत को दिया हुआ कपड़ा द्रोपदी को हिसाब में मिल ही गया, जिसका ब्याज भी अब कई गुना बढ़

चुका था उसे चुकता करने हेतु भगवान स्वयं ही द्रोपदी की मदद करने जा पहुँचे। और उस दिन दुशासन, द्रोपदी

की साड़ी खीचते गये और हजारों मीटर उनकी साड़ी का कपड़ा अपने आप बढ़ता गया। इसीलिये कहते है कि

इंसान जैसा कर्म करता है उसको उसका वैसा ही फल अवश्य मिलता है

 

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