जब तैमूर का अहंकार Inspirational Hindi Story on Ego

जब तैमूर का अहंकार Inspirational Hindi Story on Ego

जब तैमूर का अहंकार Inspirational Hindi Story on Ego

जब तैमूर का अहंकार Inspirational Hindi Story on Ego

दुनियां के खूंखार और कट्टर बादशाहों में एक नाम तैमूर का भी आता है। तैमूर एक लालची, घमंडी और

निर्दयी राजा था।उसने अपने अहंकार और जवाहरात के लालच में पृथ्वी के एक विशाल भू- भाग को रौधकर

रख दिया था।

 

वह एक क्रूर राजा था।  उसकी इस क्रूरता की कई कहानियाँ है। आज हम उसकी क्रूरता की कुछ घटनायें

आपके साथ साँझा करेंगे। एकबार की बात है।जब उसने बग़दाद की एक जगह में एक लाख मृत लोगों की

खोपड़ियों से एक बड़ा पहाड़ ही खड़ा कर दिया था।

 

एक बार तैमूर के सामने बहुत सारे गुलामों को एक साथ पकड़कर लाया गया, गल्ती से उन्ही में से एक

तुर्किस्तान के महान कवि अहमदी भी थे|जब अहमदी को तैमूर के सामने पेश किया गया तो उसने उन

गुलामों की हंसी उड़ाते हुए कहा और उसने दो गुलामों की और इशारा किया।

 

अपनी घमंड भरी आँखों से  उन दो गुलामों  की ओर इशारा करते हुये अहमदी से पूंछा मैंने सुना है कि कवि

बड़े पारखी होते है |क्या तुम मुझे बता सकते हो कि इन गुलामों की क्या कीमत हो सकती है तो अहमदी ने

बड़े सरल और सुलझे हुये शब्दों में कहा।

 

कम से कम 5000 अशर्फियां इससे कम कीमत का यहाँ कोई भी गुलाम नहीं है, फिर तैमूर ने बड़े अहंकार

के साथ पूंछा| तुम्हारे हिसाब से मेरी कीमत क्या होनी चाहिए । तब अहमदी का उत्तर कुछ इसप्रकार था।

उसने केवल  एक भाव बोला और कहा-

 

केवल 25 अशर्फियाँ जैसे ही  यह तैमूर ने सुना तो उसे क्रोध आ गया और वह गुस्से में आग बबूला हो गया

और बड़े तेज़ स्वर में चिल्लाकर बोला । बादशाह जी इतने कम में तो मेरी सदरी भी न बन पायेगी । तेरी इतनी

हिम्मत कैसे हुयी।

 

यह सब बोलने की कि मेरे जैसे बादशाह कीकीमत इतनी कम है|तो अहमदी ने बिना किसी भय के साथ उत्तर

दिया कि आप ही तो कह रहे थे, कि कवि बड़े पारखी होते है ,तो सच कह दिया मैंने आप इतना क्रोधित क्यों हो

गए।

 

आपको एक और बात बता दूँ,  यह जो  कीमत मैंने आपको बतायी है, वो आपकी सदरी की ही है|वरना आपकी

की तो कोई कीमत ही नहीं है |दुनियां वालों की नज़रों में जिस इंसान के अंदर पीड़ितों के लिये कोई भी दया भाव

नहीं  होता है ।

 

जो गरीवों को सताता है|जो अनाथों की सेवा या सहायता नहीं करता ऐसे इंसान की कीमत चार कौड़ी भी नहीं

होती है।आपसे अच्छे तो ये गुलाम ही है जो कम से कम किसी के काम तो आते है। अहमदी के ऐसे वाक्य सुनकर

तैमूर का घमंड चूर- चूर हो गया ।

 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि इंसान को अपने पैसे का घमंड नहीं होना चाहिये क्यों कि जब इंसान

मरता है तो वह अपने साथ केवल अपनी अच्छाईयां लेकर जाता है न कि धन दौलत इसीलिये हमेशा सबकी

सहायता करनी चाहिये ।

 

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