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ये पेड़ों के पत्तों को आज Hindi Poetry on feeling Sad

ये पेड़ों के पत्तों को आज

Hindi Poetry on feeling Sad

ये पेड़ों के पत्तों को आज Hindi Poetry on feeling Sad

ये पेड़ों के पत्तों को आज Hindi Poetry on feeling Sad

 

ये पेड़ों के पत्तों को आज क्या हुआ है

उदास से मालूम होते हैं

फूल भी तो पहले की तरह खिले नहीं लगते 

आने जाने वाले लोग इतने शांत क्यूँ हैं 

चारों ओर सन्नाटा सा  फैला हुआ है 

या फिर मुझे ही कुछ हुआ है

 

ये चाँद की रौशनी इतनी कम क्यूँ है

ये धरती का शोरगुल थमा सा क्यूँ है

ये हवाओं की ठंडक में कुछ कमी सी है

या फिर मेरी आँखों में ही कुछ नमी सी है

 

ये क्या कह रही हे जिन्दगी

कुछ बदल सी रही है जिन्दगी

या फिर मुझे कुछ गुमाँ हुआ है

हर एक ख़ुशी में कुछ बेबसी सी है

 

ख्वाओं में भी ख्वाव आते है

नींद से मुझे जागते है

या फिर रातें कुछ जगी सी हैं


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Comments

  1. बहुत ही अच्छी कविता है। आपने ही लिखी है या किसी और ने ?

    • धन्यवाद प्रवेश जी, ये कविता मैंने ही लिखी है वाकी और भी जितनी कवितायें हैं वो भी मैंने ही लिखी हैं.

      • बहुत अच्छा लिखती हो आप । अपने मन की बातो को कविता के रूप में बताना बहुत ही कठिन काम है। मैंने बहुत बार प्रयास किया लेकिन नही लिख पाया क्योकि सब्द ही नहीं मिलते है।

  2. Great words little words but deep saying

  3. Susheel Goyal says:

    “ये साँपों की बसती है ज़रा देख कर चलना यारों..!

    यहॉं का हर शख़्स बड़े प्यार से डँसता है..!!”

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