Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

घर से निकल तो गई हूँ heart touching Hindi Poetry

घर से निकल तो गई हूँ heart touching Hindi Poetry ।। हिंदी शायरी दिलचस्प

घर से निकल तो गई हूँ heart touching Hindi Poetry

घर से निकल तो गई हूँ heart touching Hindi Poetry

घर से निकल तो गई हूँ

पर  पता ही नहीं है

रास्ता कहाँ है जाना कहाँ है

भटकने का तो सवाल ही नहीं है

क्यूँ कि पता ही नहीं है

जाना कहाँ है मंजिल कहाँ है

खुद को ढूँढा बहुत मिल तो गई हूँ

पर पता ही नहीं है

मैं ही मिली हूँ या ये मिला कोई और

बदली बदली सी लगती हूँ खुद को

जैसे पता तो सही है पर रहता कोई और

सजाया था मैंने जो एक ख्वाव मेरा

पता ही नहीं है

नींद खुल जो गई तो मैं हूँ कोई और

करती रही बातें अकेले में खुद से

पता ही नहीं था

अन्दर ही रहता  दिलचस्प कोई और

पता ही नहीं है

रास्ता कहाँ है जाना कहाँ है

FOR VISIT MY YOUTUBE CHANNEL

CLICK HERE

 

Friends अगर आपको ये Post ” घर से निकल तो गई हूँ  heart touching Hindi Poetry ।। हिंदी शायरी दिलचस्प  ”  पसंद आई हो तो आप इसे Share कर सकते हैं.

कृपया Comment के माध्यम से हमें बताएं आपको ये पोस्ट  कैसी लगी.

 

 

DoLafz की नयी पोस्ट ईमेल में प्राप्त करने के लिए Sign Up करें

Comments

  1. HIMANSHU RAJ says:

    Best realistic and heart touching poem …. Thanks.

Speak Your Mind

*