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बहुत अजीब हूँ मैं हिंदी कविता । Hindi Poetry on understanding myself

बहुत अजीब हूँ मैं हिंदी कविता । Hindi Poetry on understanding myself   कभी-कभी लगता है मैं कुछ अजीब सी हूँ  इस अजीब होने से भी ज़्यादा अजीब है  वो अजीबपन जो कभी मुझे अच्छा लगता … [Read more...]

न जाने क्यूँ….कभी कभी अपनी परछाइयों से भी डर लगता है । Sad Hindi Poem

न जाने क्यूँ....कभी कभी अपनी परछाइयों से भी डर लगता है । Sad Hindi Poem   न जाने क्यूँ.... कभी कभी अपनी परछाइयों से भी डर लगता है जब ये अपनी बड़ी- बड़ी आँखों से मुझे घूरती … [Read more...]