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कौन है सबसे बड़ा भक्त ? Short Hindi story on Devotee

कौन है सबसे बड़ा भक्त ? Short Hindi story on Devotee

कौन है सबसे बड़ा भक्त ? Short Hindi story on Devotee

कौन है सबसे बड़ा भक्त ? Short Hindi story on Devotee

एक समय की बात है, जब नारद जी को इस बात का बड़ा घमंड हो गया, कि तीनों लोक में मुझसे बड़ा और कोई भक्त नहीं है ।

एक बार वे विष्णु जी के पास गये और उनसे बात करते हुये पूंछने लगे, आपको क्या लगता है कि, आपका सबसे बड़ा भक्त कौन

है ? भगवान तो भगवान ही है वह उनके मन की बात को भली-भांति समझ गये ।

 

वे बोले एक किसान है। वह ही मेरा सबसे बड़ा भक्त है। नारद जी यह सुनकर तुरंत ही उस किसान की झोपड़ी में जा पहुँचे। सुबह से लेकर

शाम तक उस किसान की दिनचर्या देखी, वह सुबह-सुबह उठता और नहाता, धोता और भगवान का स्मरण करके अपने हल को अपने  कंधे

पर रखकर खेत की ओर चला जाता।

 

 

और खेत में दिनभर कड़ी मेहनत करके शाम में थका हारा आता और फिर भगवान का स्मरण करता खाता, पीता सो जाता यह सब

देखकर नारद जी अचंभित हुये और तुरंत हो विष्णु जी के पास जाकर बोले -हे भगवन मैं स्वयं अपनी आँखों से उस किसान की दिनचर्या

देखकर आया हूँ।

 

मुझसे बड़ा भक्त क्यों

 

 किसान दिनभर में केवल दो बार ही आपको स्मरण करता है, जबकि मैं निरंतर आपका जप करता रहता हूँ, फिर भी वो किसान

आपकी नज़रों में मुझसे बड़ा भक्त क्यों है ? आपके लिये, फिर विष्णु जी ने हँसते हुये नारद जी से कहा कि यह अमृत का कलश पूरा

भरा हुआ है।

 

इस कलश को आपको अपने सिर पर रखना है और त्रिलोक का एक पूरा चक्कर लगाना है, परन्तु यह याद रहे कि इसकी एक भी

बूंद गिरनी नहीं चाहिये, अगर ऐसा हुआ तो आपका मष्तिष्क छिन्न भिन्न हो जायेगा। नारद जी ने कलश लिया और चल पड़े। और

परिक्रमा पूरी कर आये । तब विष्णु जी ने नारद जी से पूंछा कि जब आप परिक्रमा कर रहे थे, तो आपने मुझे कितनी बार स्मरण किया।

 

नारद जी बोले मैं अपने कलश की ओर अपना ध्यान केन्द्रित किये था इसीलिए मैंने आपको एक भी बार याद नहीं किया मैं आपको स्मरण

करना ही भूल गया। तब विष्णु जी ने नारद जी से कहा – देवर्षि आप किसान की बात करते है, तो सुनिए ,वह अपने काम करने के साथ

साथ भी मुझे दो बार याद तो करता ही है इस बात को सुनकर नारद जी चुप हो गए और उनका मोहभंग हो गया।

 

हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी भी बात पर किसी भी प्रकार का कोई घमंड नहीं करना चाहिये, बल्कि

जो हमारे पास है उसी में खुश होना चाहिये ।

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