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संगीतकार का प्रतिशोध । The Real Meaning of Revenge in Hindi । बैजू बावरा की कहानी

संगीतकार का प्रतिशोध । The Real Meaning of Revenge in Hindi । बैजू बावरा की कहानी

संगीतकार का प्रतिशोध । The Real Meaning of Revenge in Hindi । बैजू बावरा की कहानी

संगीतकार का प्रतिशोध । The Real Meaning of Revenge in Hindi । बैजू बावरा की कहानी

बैजनाथ के पिता जब मृत्यु की शैय्या पर पड़े थे और अपने आखिरी दिन गिन रहे थे तो उन्होंने

बड़े पीड़ा भरे स्वर में अपने प्यारे पुत्र से कहा कि बेटा, मैं अपनी संगीतकला के द्वारा जीते जी तो

अपने दुश्मन को हरा नहीं पाया।

 

इस बात की मेरे मन में बड़ा ही  खेद है तो क्या तुम मेरे लिये कुछ कर सकते हो। बैजनाथ ने अपने

पिता के समक्ष बड़े भावुक स्वर में प्रण लिया- मैं आपके दुश्मन से बदला अवश्य लूँगा, पिताजी।

इसके बाद बैजनाथ के पिता ने सदा के लिये अपनी आँखे मूंद ली और ईश्वर की शरण में चले गये।

 

उसके बाद बैजनाथ के मन में विचार उठा कि पिता के शत्रु से बदला लेने का सबसे अच्छा तरीका

यह है  कि मुझे संगीत के क्षेत्र में मैं उससे भी बढ़कर काम करना होगा उसने मन ही मन प्रतीज्ञा की

और वह संगीत की साधना करने में लगा।

 

 

                                                                                             बैजू बावरा की कहानी

कुछ ही सालों में बैजनाथ संगीत के क्षेत्र में ऐसा खोया कि लोग उसे बाबरा ही कहने लगे। अब उसकी

ख्याति दूर-दूर तक फ़ैलने लगी। एक दिन वहां के राजा के राजा ने सोचा कौन है ऐसा जो इतना अच्छा

संगीतज्ञ है।

 

वे उसकी ख्याति व संगीत कला का जादू देखने सुनने खुद अपने राज दरवार के गायक को अपने साथ

लेकर बैजनाथ के पास पधारे।  जैसे ही उन्होंने बैजनाथ के संगीत को सुना तो राजा बैजनाथ की वाह

वाह कर उठे। राजा ने बैजनाथ को  अपने साथ राजमहल चलने को कहा पर वह जाने को तैयार

नहीं हुआ।

 

उसने कहा ईश्वर के मुकावले किसी  व्यक्ति विशेष के दरवार में गाना, संगीत और कला के लिये मुझे

कुछ उचित नहीं लगता है। राजा के साथ आया मशहूर संगीतकार व गायक भी इस बात से नतमस्तक

हो गया।                                                      

 

बैजनाथ के समक्ष उसे अपनी साधना तुच्छ अनुभव हुई। इस वक्त बैजनाथ अपने पिता जी की इच्छा को

पूरी कर अपना प्रतिशोध  ले चुका था। राजा के साथ आया संगीतज्ञ ही बैजनाथ के पिता का संगीत के

क्षेत्र का शत्रु था।

 

वह गायक और राजा कोई दूसरे नहीं बल्कि संगीत सम्राट तानसेन और बादशाह अकबर थे। यह बैजनाथ

ही आगे चलकर ‘बैजू बावरा के नाम से प्रसिद्द हुये। उनका मानना था कि शत्रु को हथियार से नहीं बल्कि

कर्मों की बड़ी रेखा खीचकर ही पराजित किया जाना सबसे सही तरीका है।

 

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