तानाजी मालुसरे की जीवनी । Tana Malusare Biogragphy in Hindi

तानाजी मालुसरे की जीवनी ।

Tana Malusare Biogragphy in Hindi

तानाजी मालुसरे की जीवनी । Tana Malusare Biogragphy in Hindi

तानाजी मालुसरे की जीवनी । Tana Malusare Biogragphy in Hindi

 तानाजी एक वीर पुरुष थे उनकी वीरता के किस्से चारों दिशाओं में फैले है। तानाजी मालुसरे छत्रपति शिवाजी के सबसे अच्छे मित्र थे।

मालुसरे  समेत ऐसे कई वीर पुत्र थे जिन्होंने अपनी मात्रभूमि की रक्षा में लड़ते हुये अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया।

वे मराठी सेना के सेनापति थे।

अंग्रेजों की गुलामी से छुटकारा दिलाने में छत्रपति शिवाजी और उनके घनिष्ट मित्र का बहुत बड़ा हाथ था।

 

तानाजी का जन्म 1600 में महाराष्ट्र के गाँव गोदोली में हुआ था। उनका जन्म एक हिन्दू कोली परिवार में हुआ था।

उनके पिता का नाम सरदार कलोजी था और माँ का नाम पार्वतीबाई था।

तानाजी को तलवारबाजी का बचपन से ही बड़ा शौक था। तलवारबाजी के इस शौक के कारण वे इसमें निपुण थे ।

जिसकारण वे आगे जाकर मराठाओ के सेनापति बने।

 

तानाजी और शिवाजी की मित्रता की एक छोटी सी कहानी :

 

एक बार की बात है वैसे तो दोनों सभी युद्धों में साथ में शामिल होते थे। पर एक बार की बात है

जब वह औरंगजेब से मुलाक़ात करने दिल्ली गये थे। औरंगजेब ने चालाकी से दोनों को कारागार में डाल दिया था।

फिर दोनों ने अपनी  सूझ-बूझ से एक योजना बनाई।

और बड़ी मुश्किल से एक मिठाई के बड़े पिटारे से बाहर निकलने में सफल हुये।

 

तानाजी की वीरता के किस्से :

शिवाजी की माँ जीजाबाई एक बार अपने किले की छत पर घूम रही थी अचानक वह रुकी।

और बड़ी देर तक कोंढाणा का किला देखने लगी।

तभी उनके पुत्र शिवाजी वहां पहुंचे और अपनी माँ को इसतरह मन्त्र मुग्ध देखा तो

उन्होंने अपनी माँ से पूंछा माँ आपको किस बात की चिंता है ?

वह समझ गए और वहां से चले गये। फिर उन्होंने अपनी सभा में सबको बुलाया।

कोंढाणा किले पर चढ़ाई चड़ने की बात कही।

तानाजी के बेटे का विवाह था । जैसे ही उनको ये ज्ञात हुआ कि उनके मित्र कोंढाणा पर चढ़ाई करने की तैयारी में है।

 

उन्होंने अपने पुत्र के विवाह को छोड़ दिया और छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी अपनी सेना में कई सरदार होने के वावजूद भी तानाजी को ही चुना।

कोंढाणा किले को प्राप्त करना इतना आसान नहीं था। कोंढाणा की बनाबट तो ऐसी थी।

कि उसके अंदर जाना भी आसान नहीं था।  लेकिन शिवाजी और तानाजी ने फैसला ले लिया था

कि वे इस किले को जीत कर रहेंगे ।

 

 

इस किले की पहरेदारी 5000 सेनिक किया करते थे। इस किले की सुरक्षा उदयभान नामक एक आदमी के पास थी।

उभयभान एक खतरनाक आदमी था । वह एक दैत्य के समान था। कहा जाता है

कि वह 2 भेड़े और 25 सेर चावल एक बार में भोजन में गृहण कर लेता है।

अब रही बात कि क्या किया जाये कि किले के अंदर प्रवेश मिल पाये।

 

 

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4 फरवरी 1870 की रात, तानाजी ने सबकुछ सोच-समझकर पश्चिम भाग की पहाड़ियों से चढ़ाई करना तय किया।

तानाजी के पास एक जीव था।जिसका नाम घोरपड़ था। यह एक ऐसा जीव होता है। जो एक बार दीवार पर चिपक जाये।

तो हजारों पुरुषों के हिलाने पर भी नहीं हिलता।

तानाजी ने घोरपड़ के शरीर से एक रस्सी बांधी  और  कोंढाणा के पश्चिम भाग से घोरपड़ की सहायता से चढ़ाई शुरू की।

सफलता पूर्वक ऊपर पहुँच गये और कोंढाणा का द्वार खोला । और मुगलों पर आक्रमण कर दिया।

तानाजी एक शेर की तरह लड़े इस युद्ध में उनकी एक तलवार टूट गयी।

 

तो उन्होंने अपनी पगड़ी के फेटे को अपने हांथों में बांधकर उसको एक ढाल की तरह उपयोग किया।

कोंढाणा के किले पर जीत हासिल कर ली।

                                                              Tana Malusare Biogragphy in Hindi

वे इस युद्ध में इतने घायल हो गये कि उन्होंने अपने प्राणों को न्योछार कर दिया।

शिवाजी बहुत दुखी हुये क्यों कि कोंढाणा की ख़ुशी में वे खुश न हो पाये।

इस युद्ध में उन्होंने किला तो हासिल कर लिया पर अपना सबसे घनिष्ट मित्र खो दिया।

 

 

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