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न जाने क्यूँ….कभी कभी अपनी परछाइयों से भी डर लगता है । Sad Hindi Poem

न जाने क्यूँ....कभी कभी अपनी परछाइयों से भी डर लगता है । Sad Hindi Poem   न जाने क्यूँ.... कभी कभी अपनी परछाइयों से भी डर लगता है जब ये अपनी बड़ी- बड़ी आँखों से मुझे घूरती … [Read more...]

कब ख़ामोशी जुबाँ बन गई हिंदी शायरी Best Hindi shayari

कब ख़ामोशी जुबाँ बन गई हिंदी शायरी Best Hindi shayari कब ख़ामोशी, जुबां बन गई मैं क्या थी, आज क्या बन गई चलते चलते, मैं खुद रास्ता बन गई जागते- जागते, रात सुबह बन गई   बैठे … [Read more...]