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निर्मल मन से दे दान हिंदी कहानी Motivational Short Hindi Story on Donation

निर्मल मन से दे दान हिंदी कहानी

Motivational Short Hindi Story on Donation

निर्मल मन से दे दान हिंदी कहानी Motivational Short Hindi Story on Donation

निर्मल मन से दे दान हिंदी कहानी Motivational Short Hindi Story on Donation

एक बार चीन के चांग चू प्रदेश में वहां के एक महंत ने भगवान बुद्ध की एक बड़ी प्रतिमा का निर्माण

के लिये धन इकठ्ठा करने के प्रयोजन से अपने शिष्यों को घर-घर भिजवाया।

लोगों ने अपनी श्रद्धानुसार उन शिष्यों को धन दिया। वे अलग-अलग लोगों से धन एकत्र कर रहे थे।

 

एक शिष्य था उसको एक छोटी सी बालिका मिली बालिका का नाम तिन-नू था, तिन-नू के पास एक सिक्का था।

वह उस शिष्य को एक सिक्का दान कर रही थी, ताकि भगवान बुद्ध की मूर्ति बनने में उसका भी सहयोग शामिल हो जाये।

किन्तु शिष्य तिन-नू के हाँथ में सिक्का देखकर नाक- भौह सिकोड़ने लगा। उसने बालिका से उस सिक्के को नहीं लिया।

 

कुछ दिनों बाद धन की पूर्ति होने पर भगवान बुद्ध की एक सुंदर मूर्ति का निर्माण होना प्रारंभ हो गया।

किन्तु बार-बार प्रयासों के बाद भी मूर्ति सुंदर ढंग से पूर्ण नहीं हो पा रही थी।किसी को यह भी समझ नहीं आ रहा था।

कि आखिरकार ऐसा हो क्यों रहा है।

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मूर्ति पूर्ण एकाग्रता व लगन से बनाने के बाद भी सुंदर क्यों नहीं बन पा रही है। अंत में महंत ने सभी शिष्यों को बुलाया ।

और उनसे दान एकत्र करते समय घटे सारे प्रसंगों को सुनाने को कहा।

कुछ ही देर बाद एक शिष्य के वृतान्त में तिन-नू बालिका का प्रसंग सुनकर महंत को एक झटका लगा ।

 

और उन्होंने अपने शिष्य से कहा कि इसी समय बालिका के पास जाकर क्षमा मांगे

व वह सिक्का भी उस बच्ची से लेकर आये उनका आदेश सुनकर शिष्य ने बालिका तिन-नू को खोजा।

जब वह मिली तो उससे क्षमा मांगकर सहर्ष वह सिक्का ले लिया।

 

कहते है कि धातुओं के घोल में उस एक सिक्के को मिला देने पर सहज ही एक सुंदर मूर्ति का निर्माण हो गया।

कहा जाता है कि अब भी उस प्रतीमा के ह्रदय के ऊपर एक सिक्के जैसा उभार है।

निर्मल मन से दिया गया दान ऐसा ही होता है।

 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दान हमेशा श्रद्धानुसार होता है जो मिले ख़ुशी-ख़ुशी गृहण करें।

 

 

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