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अशफाकउल्ला की देशभक्ति | Motivational Hindi Story on Patriotism

अशफाकउल्ला की देशभक्ति |

Motivational Hindi Story on Patriotism

अशफाकउल्ला की देशभक्ति  | Motivational Hindi Story on Patriotism

अशफाकउल्ला की देशभक्ति | Motivational Hindi Story on Patriotism

यह उन दिनों की बात है, जब अशफाक़उल्ला खां शाहजहाँपुर के आर्य समाज मंदिर में प. रामप्रसाद ‘बिस्मिल’

के साथ ठहरे हुये थे । तभी कुछ दंगाईयों ने मंदिर को घेर लिया ।

दंगाई उत्तेजक नारे लगा रहे थे और मंदिर को नष्ट करना चाहते थे ।

दंगाईयों के इरादे भांपते ही क्रांतिवीर अशफाक़उल्ला ने अपनी पिस्तौल निकाली

 

और मंदिर के दरवाजे के पास पहुंचकर बोले – अगर किसी ने मंदिर की ईट को हाथ

भी लगाया तो उसे गोली से भून दूंगा । कुछ दंगाइयों ने उन्हें पहचान लिया ।

उन में से एक ने कहा – तू तो मुसलमान है, तेरा इस मंदिर से क्या लेना देना ?

तब अशफाक़उल्ला ने उन्हें जबाब दिया- मंदिर और मस्जिद मालिक की इबादत करने के पवित्र

स्थान है | मैं तो दोनों के प्रति सामान श्रद्धा रखता हूँ ।

 

इसलिये मंदिर की हिफाजत करना भी मेरा कर्तव्य है । मैं एक हिन्दुस्तानी क्रन्तिकारी हूँ ।

देश के लिये सर्वस्व न्यौछावर करने पर मैं अपने आप को गौरवान्वित समझता हूँ ।

हिन्दुस्तान को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है ।

अशफाक़उल्ला की यह बात सुनकर दूसरा दंगाई बोला- हमें तुम्हारी बातें समझ में नहीं आती ।

 

तुम्हे मालूम है कि क्रांतिकारी का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों को यहाँ से भगाकर हिन्दुस्तानियों की

सल्तनत कायम करना है और जब हिन्दुस्तानी इस देश पर राज करेंगे, तो तुम्हे भी यहाँ से खदेड़

दिया जायेगा | फिर भी तुम क्रांतिकारी बनकर घूम रहे हो व स्वयं पर गर्व कर रहे हो ।

दंगाइयों की यह बात सुनकर अशफाक़उल्ला बोले-हिन्दुस्तान ऐसा देश है

जहाँ जाति, धर्म से परे मानवीयता को महत्त्व  दिया जाता है ।

हिन्दुस्तान की सभ्यता एवं संस्कृति प्रारंभ से सभी को समान समझती है ।

यह सुनते ही सभी दंगाई चुपचाप वहां से चले गये ।

 

कहने का तात्पर्य यह है कि हम किसी भी देश में रहते हो या हम किसी भी जाति या

धर्म से सम्बन्ध रखते हो पर हम सबका ईश्वर केवल एक है

 

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