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कला का अपमान ।। Motivational Hindi Story on Art

कला का अपमान ।। Motivational Hindi Story on Art

कला का अपमान ।। Motivational Hindi Story on Art

कला का अपमान ।। Motivational Hindi Story on Art

एक राजा था, उसे सुंदर और विशाल इमारतें बनवाने का बड़ा शौक था। वहअपने राज्य को विशाल इमारतों से सुसज्जित बनाना चाहते थे, इसके लिए राजा ने दूर- दूर से कार्य करने में  कुशल कारीगरों को अपने राज्य में बुलवाया, ताकि वे उसके राज्य में सुंदर और विशाल भवनों का निर्माण कर सकें ।

राजा कला का महत्व समझते थे और वह इन शिल्पियों का बहुत आदर करते थे और उन शिल्पियों को उनकी मेहनत के अनुसार  उचित पैसे देता था। उसके अलावा उन्हें पुरस्कार भी दिया करता था।

एक अनुभवी शिल्पी जब वृद्ध हो गया तो , वह राजा से बोला महाराज मैने अपना जीवन राज्य की सेवा में निकाल दिया लेकिन अब में बृद्ध हो चुका हूं और मैं सेवा से  निवृत होना चाहता हूँ अर्थात मुझे आप इस सेवा से  मुक्त करने की कृपा  करे ,

तो राजा ने उस शिल्पी से कहा- “हे शिल्पी तुम्हारी सेवाओं के लिए केवल मैं ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य आपका आभारी है”  आपको सेवा निवृत्त होने का पूरा अधिकार है। लेकिन आपसे मेरी एक विनती है कि आप सेवा निवृत्त होने से पहले आप मेरे लिये एक और नई  इमारत बनाइये जो कि आज से पहले बनाई गई इमारतों में से सबसे श्रेष्ठ और उत्कृष्ट हो”

शिल्पी राजा की इच्छा टाल नहीं सकता था इसलिये दूसरे दिन से ही वो अपने काम मे लग गया लेकिन इस बार वह यह काम बेमन से कर रहा था। इसलिये उसकी  शिल्पी ने इस बार क्षेष्ठता और उत्कृष्टता  का परिचय नहीं दिया जिसकी उससे राजा ने अपेक्षा की थी । उसने अपना काम पूरा कर दिया और राजा से फिर सेवा मुक्ति की प्रार्थना की ।

तब राजा ने कहा मैं आपकी कला से बेहद खुश हूं – तभी तो मैंने आपसे इस इमारत का निर्माण करवाया था ताकि मैं पुरस्कार के रूप में आपको यह भेट में दे सकूँ।

शिल्पी प्रसन्न तो हुआ पर पूरी तरह से नहीं क्यों कि इसबार उसने इस इमारत का निर्माण बेमन से किया था और उसमें उसने कई गलतियां की थी । और उसे इस बात का बेहद अफसोस था। अब वह ये समझ गया कि बेमन से कार्य करके उसे न केवल राजा का बल्कि अपनी कला का भी अपमान किया। इस तरह वह शिल्पी अपना वास्तविक पुरुस्कार खो बैठा।

 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिए. तभी हम भी अपने आप से संतुष्ट रहेंगे. बाहरी पुरूस्कार के साथ- साथ हमें अन्दुरुनी पुरूस्कार की भी जरुरत होती है, ताकि हम अपने काम से खुश रह सकें.

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Comments

  1. bahut hi badhiya,…. jo kaam bhi kro hmesha lagan ke sath krna chahiye,,… kya pta kismat kab hume sbse badha puraskaar de de

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