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एक  गुब्बारे का जीवन Motivational Article In Hindi

एक  गुब्बारे का जीवन Motivational Article In Hindi

एक  गुब्बारे का जीवन Motivational Article In Hindi

एक  गुब्बारे का जीवन Motivational Article In Hindi

आइये आज हम आपको एक गुब्बारे की कहानी के बारे में बताते है कि एक निर्जीव गुब्बारा कहाँ-कहाँ से

गुजरता है और उसके जीवन में भी कैसी- कैसी कठिनाइयाँ आती है। एक गुब्बारा जिसे बच्चे ,बड़े और

बूढ़े सभी बहुत पसंद करते है।

 

इनका प्रयोग ज़्यादातर हम जन्मदिन की पार्टियों में करते है, ये कई रंग और कई आकार के होते है

जो जन्मदिवस, शादियों आदि की साज सज्जा में उपयोग किये जाते है। गुब्बारे तो हम पुराने ज़माने

से देखते आ रहे है पर उस समय के इनके रूप में और अब काफी परिवर्तन आ गया है।

 

जैसा कि आप जानते है, कि आपने गैस का गुब्बारा नाम सुना होगा जो आपके छोड़ते ही हवा में ऊपर

चला जाता है और फिर नीचे कब और कहाँ आता ये पता नहीं चलता, आपने ग्लाइडर का नाम भी सुना

होगा, इस गुब्बारे पर तो मनुष्य बैठकर अपने उड़ने का शौक भी पूरा करते है।

 

कुछ गुब्बारे आपने रात में एक लाइट के साथ भी आसमान में तैरते हुये अवश्य देखे होंगें। हाँ यह तो सही

है, कि वे गुब्बारे हम बड़ों के मन को भी बहुत भाते है। रात के समय जब यह अपनी रोशनी के साथ उड़ते

है, तो उनको देखते रहने का मन होता है। हमारी नज़रें इसको देखते हुये आपको आपकी पलक झुकाना भी

मंज़ूर  नहीं होता।

 

क्या आप जानते है गुब्बारा कहाँ-कहाँ से होकर गुजरता है ?

जब हम एक बार इसमें हवा भरकर इसे फुला देते है तो इसका आकार बड़ा हो जाता है, और यह हल्का भी हो जाता है

अगर हम इसको इसको हवा में उपर की तरफ फेक देते है तो ये कुछ देर के लिये हवा में उड़ने लगता है इसतरह बच्चे

इसको अपने हांथों से एकदूसरे के साथ खेलते है|

 

निर्जीव वस्तुओं का सम्मान

कभी यह उडकर दूर चला जाता है तो इसका ठिकाना ही नज़र नि आता कि कहाँ थमेगा ये जाकर कभी ये चलती गाड़ियों

से टकराता है तो कभी किसी के पैरों से नीचे रौंध दिया जाता है न जाने कितनों के पैरों के नीचे आता है, पर फिर भी यह

अपना साहस नहीं खोता आगे ही बढ़ता जाता है, तो कोई इसके फूटने की आवाज़ से डर भी जाता है।

 

एक समय ऐसा भी आता जब यह पाकर एक बच्चा ख़ुशी से झूम उठता है। जैसे ही बच्चा इसे पाकर खुश हो जाता है तो

समझो लगता है ,अब उस गुब्बारे को उसकी मंजिल मिल गयी। इसीलिए कहते पता नहीं इस संसार में कोनसी चीज़

किसी की ख़ुशी का कब कौन सा कारण बन जाये।

 

ये हमें पता नहीं होता तो हमें सभी निर्जीव वस्तुओं का सम्मान करना चाहिये चाहे वह एक गुब्बारा ही क्यों न हो।

 

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