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मानवता के पुजारी हिंदी कहानी | Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang

मानवता के पुजारी हिंदी कहानी | Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang

मानवता के पुजारी हिंदी कहानी | Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang

मानवता के पुजारी हिंदी कहानी | Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang

एक दिन गाँधी जी के आश्रम में एक चोर आ गया

उस चोर को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला ।

चोर रसोईघर में घुस गया और वहां जाकर छिप गया ।

आश्रम के एक सेवक ने उस चोर को देख लिया ।

उस सेवक ने अन्य आश्रम के लोगों को उस चोर के बारें में बता दिया ।

सबने मिलकर उस चोर को एक अँधेरी कोठरी में बंद कर दिया ।

रात अधिक हो चुकी थी इसीलिये गाँधी जी को उस चोर के बारे में नहीं बताया ।

चोर सारी रात कोठरी में बंद रहा ।

 

सुबह हुयी गाँधी जी नहा धोकर जब नाश्ता करने के लिए बैठे ।

सामने से उन्होंने देखा कि आश्रम के लोग एक आदमी को बाँधे उनके पास चले आ रहे है ।

बापू जी जी खाते हुए रुके और रसोइये से बोले ये किसे ला रहे हो ।

वह बोला यह चोर है । कल रात के समय रसोई में घुस गया था ।

पर हमने इसको कोठरी में बंद कर दिया था ।

 

जब सारी बात गाँधी जी ने सुन ली तब वे बोले –

आप लोगों ने इस गरीब को कुछ खिलाया पिलाया नहीं ।

सब उनकी यह बात सुनकर बापूजी से बोले ये चोर है | हमने इसे खाने को कुछ नहीं दिया ।

गाँधी जी ने कहा पहले इसे भोजन करवाओ फिर मेरे पास लेकर आना ।

 

सभी आश्रमवासी बापू की और देख रहे थे और बापू शांत थे । सभी ने उसको भोजन कराया |

उसके बाद सभी उसे लेकर बापू जी के पास गये और आश्चर्यचकित होकर देखने लगे ।

सभी आश्रमवासियों जिज्ञासु आश्रम वासियों की जिज्ञासा शांत करते हुये कहा –

“यह व्यक्ति चाहे चोरी करने आया था पर यह हमारी तरह इंसान ही है ”

 

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हमने इसे रात भर अपने आश्रम में बंधी बनाकर रखा तो क्या इसकी भूख प्यास की चिंता करना हमारा

कर्तव्य नहीं है ? गाँधी जी की बात सुनकर सभी आश्रमवासियों के सिर उनके आगे झुक गये ।

वह चोर गाँधी जी के पैरों में गिर गया और रोते हुये बोला बापूजी मुझे माफ़ कर दीजिए।

गाँधी जी ने भी उसे बड़े प्यार से समझाते हुये बोला कि देखो चोरी करना पाप होता है ।

तुम्हे चोरी नहीं करनी चाहिए अगर अपने परिवार के पालन पोषण के लिये ये सब करते हो ,

तो मैं अपने आश्रम में तुम्हे कोई काम दे देता हूँ ।

 

ऐसे थे हमारे बापू जिन्होंने उपदेश देने से पहले चोर को इंसान समझा और उसके पेट की भूख शांत की ।

यह बात सच है कि प्रेम और दया से एक चोर भी सत्जन बन जाता है ।

 

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