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How to behave your teenager children Hindi article

How to behave your teenager children Hindi article

How to behave your teenager children Hindi article

How to behave your teenager children Hindi article

 Friends जब हमारे बच्चे छोटे होते हैं तो हमारा उनके ऊपर पूरा Control होता है. जैसे-जैसे वो बड़े होते हैं स्कूल जाते हैं. बाहर के लोगों से मिलते हैं, अपने Friends से बात करते हैं. बाहर की दुनिया देखते हैं. उनके सोचने का दायरा भी बढ़ता है. इस बीच वो हमसे काफी सारे Question भी करते हैं. उनमें से कई सारे सवालों के हम जबाब हम दे देते हैं और कई सारे जबाब हमें खुद पता नहीं होते.

जब वो Thirteen की Age में आते हैं तो उनके अन्दर कुछ हार्मोन्स Change होते हैं इस वजह से उनका Behave भी कुछ Change होता है. उनके अन्दर हजारों सवाल चल रहे होते हैं. कई बार झिझक की वजह से वो हमसे सवाल पूछने से डरते हैं.

इस Age में बच्चे थोड़े Aggressive हो जाते हैं, Friends के साथ ज्यादा रहना चाहते हैं. उनकी जिद कुछ बढ़ जाती है कुछ आदते जो अजीब लगती हैं जैसे सारा दिन फ़ोन पर Chat करना, घूमने के लिए जिद करना. कपड़ों के लिए अपने Friends की बराबरी करना. छोटी- छोटी बातों  पर गुस्सा आना.

ऐसे में माता- पिता  को Patient रखना चाहिए और अपने बच्चों को समझने की कोशिश करना चाहिए. आपके बच्चे बड़े हो रहे हैं. सबसे पहले तो आपको उनके साथ Friend की तरह Behave करना चाहिए, ताकि वो अपनी हर बात आपके साथ Share कर सकें. उन्हें आपको कोई भी बात बताने में झिझक महसूस न हो.

आपको उनकी हर बात ध्यान से सुनना चाहिए और तुरंत React नहीं करना चाहिए, दोस्त क्या करते हैं ? उनकी हर बात सुनते हैं इसलिए वो दोस्तों के पास भागते हैं.अगर कोई बात गलत लगती भी है तो उस Time पे तुरंत React नहीं करना चाहिये. आपकी बेटी हो या बेटा उसको आप ध्यान से सुन लें .

बाद में एक Friend की तरह आप उसको समझाने की कोशिश करें. देखा जाए तो आपके पास इसके आलावा कोई भी रास्ता नहीं है अगर आप ज्यादा डांटते है तो वही काम वो आपसे छुपा कर करेगा. बाहर तो दोस्त साथ देने के लिए तैयार बैठे हैं.

Actually होता ये है कि घर के बाहर भी उनके Friends के बीच उनकी एक अलग दुनिया बन जाती है. कल तक जो बच्चा आपकी नज़र से दुनिया देख रहा था,आज अपने नजरिये से दुनिया को समझने की कोशिश कर रहा है. ये सही भी है उसे अपने तरीके से सही और गलत का एहसास होना जरुरी भी है.

आपका काम है उसको सही रास्ता दिखाना, समय समय पर उसको समझाते रहना उसके Subconscious Mind में ये बातें जरुर रहेंगी. आपको घर पर ही इतना Bond बनाकर रखना चाहिए कि आपका बच्चा कुछ भी करने से पहले आपसे Discuss करे.

बच्चे को समझाना कभी- कभी डांटना भी बेहद जरुरी है मगर जरुरत से ज्यादा डांटना मारना ये सब करने से वो आपसे दूर हो जाते हैं, फिर Start करते हैं झूठ बोलना. आपको पता ही नहीं चलता उनकी Life में क्या चल रहा है. बच्चे को डराने से ज्यादा बेहतर है उसे प्यार देना.

आपका लड़का हो या लड़की आपको उनसे खुल कर बात करनी चाहिये. हर इंसान इस Age से गुजरता है. एक तरफ कुछ बनने की और मेहनत करने की यही Age होती है, मगर ये भी सच है कि बिगड़ने की भी यही Age होती है. आपको अपने बच्चों को समझाना होगा दोस्तों के साथ घूमना, बात करना, Enjoy करना सब अच्छा है मगर बिना Distract हुए उन्हें अपनी पढाई पर Focus करना चाहिए.

इस Age में अक्सर लड़के और लड़कियों को प्यार होने की गलतफहमी हो जाती हैऔर वो अपनी पढ़ाई से Distract हो जाते हैं. इसलिए उन्हें बताएं कि Love और Attraction क्या होता है. शादी क्या होती है. ऐसा करके आप उन्हें भटकने से बचा सकते हैं.

ऐसा मत समझिये कि आपके समझाने से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा.

आपके समझाने से उनके दिमाग में सारी बातें Clear रहेंगी. उन्हें पता होगा कि वो क्या कर रहे हैं. आपके घर का जैसा माहौल है और जो संस्कार आपने दिए है वो कभी उन्हें भूलेगा नहीं. धीरे- धीरे उसे खुद अपनी मंजिल दिखाई देने लगेगी और वो आगे बढ़ने की कोशिश करेगा क्योंकि उसको भरोसा है कि उसके Parents हमेशा उसके साथ हैं. उसका Decision making power भी बढ़ेगा.

बस आपको उन्हें Time देना होगा उनके साथ बैठना होगा. उनसे बात करनी होगी. उनकी बातों को सुनने में भी Interest लेना होगा. आपके ऐसा करने से वह भी कुछ अच्छा करने की कोशिश करेगा, जिससे उसके माता पिता खुश हों.

 

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Comments

  1. आदरणीय प्रियंका जी, इस एजुकेशनल पोस्ट के लिए शुक्रिया. आप इसी तरह की अन्य पोस्टें मेरी वेबसाइट “एजुकेशन टुडे” पर देख सकती हैं.

    http://www.edutoday.in

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