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Hindi story on human capabilities मनुष्य की क्षमतायें

Hindi story on human capabilities

मनुष्य की क्षमतायें

Hindi story on human capabilities मनुष्य की क्षमतायें

Hindi story on human capabilities मनुष्य की क्षमतायें

बहुत  पुरानी  बात  है। एक  बालक था।  जिसका  नाम  सैंडो था। उसकी  उम्र  तकरीबन  11-12  साल  थी।  उसे  अक्सर  जुकाम  रहता  था।  खाँसी  की   वजह  से  वह  बालक  लगातार  परेशान  रहता था और  लीवर भी  बढ़ा  हुआ था।

एक  दिन  वह  पिता  के  साथ  अजायब  घर  देखने  गया ।  वहाँ   उसने  अनेक  इंसानी  मूर्तियाँ   देखी  जो  बहुत  बलिष्ठ  कद  काठी   की  थी।

उसने अपने  पिता  से  पूछा –

ये  किसकी  मूर्तियाँ  है ?

पिता  ने  जबाब  दिया –

इस  दुनियाँ  में  हमसे  पहले  जो  इन्सान  थे। ये  उनकी  मूर्तियाँ  हैं।

तब  सैंडो  ने  अगला  सवाल  किया –

“ये  जो   हमारे   पूर्वजों   की   मूर्तियाँ  रखी  हुई  हैं ,  क्या  वह  देखने  में  ऐसे  ही  लगते  थे ,  उनकी  गर्दन  इतनी  ही  मोटी  थी  और  उनके  सीने  क्या  इतने  ही  चौड़े  थे।

पिता  ने   कहा –

हाँ  बेटा  वह  जैसे  दिखते थे , वैसी  ही  उनकी   मूर्तियाँ  बनाई  गई  हैं।

सैंडो *पूछा-

“पिताजी क्या मैं भी ऐसा बन सकता हूँ ?”

पिता ने उसे समझाते हुये कहा –

हाँ बेटा क्यों नहीं तुम भी ऐसे बन सकते हो।  दुनिया में अगर एक इन्सान कोई काम कर सकता है , तो दूसरा व्यक्ति की वह कर सकता है। भगवान ने सभी को असीम शक्तियाँ दी हैं बस इन्सान इन शक्तियों  को पहचान नहीं पाता।

जो रास्ता एक इन्सान के लिए खुला हें , वह दूसरे इन्सान के लिए भी खुला हें , बस हर इन्सान को अपनी क्षमता के अनुसार समय कम और ज्यादा लग सकता है । मगर एक इन्सान ने जो काम किया हें , वह दूसरे के लिए नामुमकिन नहीं है।

अजायब घर से लोटने के बाद सेंडो ने मन ही मन यह पहलवान बनने का निर्णय कर लिया था। उसने अपने पिता से कहा बताइए पिताजी – 

“मैं पहलवान कैसे बन सकता हूँ ? पहलवान बनने के लिए मुझे क्या करना होगा ?”

उसके पिता ने उसे बताया –

“बेटा सबसे पहले तो तुम अपने खानपान व दिनचर्या पर नियंत्रण रखो और अपने शरीर को स्वस्थ रखने की कोशिश करो। रोज सबेरे कसरत करो।अपने विचारो पर संयम रखो। अगर तुम्हारा  खान पान और  विचार शुद्ध होंगे। तो तुम्हारा शरीर भी स्वस्थ रहेगा।”

इस प्रकार पिता ने एक प्रारंभिक ढांचा बनाकर बच्चे को दिया। सैंडो ने  अपनी दबी हुई क्षमताओं  को समझा और उसका अच्छी तरह इस्तेमाल किया।

आगे चलकर यही बच्चा विश्व का नामी पहलवान डैमियन सैंडो बना।

“इस कहानी से हमें ये शिक्षा  मिलती है कि हर इन्सान के अंदर कुछ भी कर सकने की क्षमता है। कोई भी इन्सान चाहे तो अपनी इक्षाशक्ति और कर्म के द्वारा कुछ भी पा सकता हें , बस देर है उसे अपनी क्षमताओं को पहचानने  की। हर इन्सान अपने अन्दर छिपी क्षमताओं का  उपयोग करके मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य को हासिल कर सकता है।”

 

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Comments

  1. बहुत ही प्रेणनादायक कहानी हैं, धन्यवाद दोस्त…

  2. very inspiring story…..thanks for share……

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