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गाड़ीवान किसान की हनुमान भक्ति की कहानी Hindi Story of Farmer

गाड़ीवान किसान की हनुमान भक्ति की कहानी Hindi Story of Farmer

गाड़ीवान किसान की हनुमान भक्ति की कहानी Hindi Story of Farmer

गाड़ीवान किसान की हनुमान भक्ति की कहानी Hindi Story of Farmer

बहुत पुरानी  बात है, एक गाड़ियान था। वह रोज अपनी गाड़ी में माल भरकर शहर ले जाता था ।

वहां जाकर वह माल बेचता था उससे उसे जो भी आय होती थी , उसी से अपने परिवार का खर्चा चलता था ।

वह हनुमान जी का बहुत बड़ा भक्त था । वह रोज सुबह मंदिर जाता था और हनुमान जी की पूजा करता था ।

एक बार वह शहर से माल बेचकर वापस लौट रहा था। बारिश के मौसम में जगह जगह रास्ते  में दलदल हुआ करते थे । बहुत संभालकर गाड़ी चलाने के बाद भी  रास्ते में उसकी गाड़ी के पहिये दलदल में फँस गये।

बैलों ने बहुत जोर लगाया लेकिन कोई फायदा नहीं । गाड़ीवान ने जब देखा कि बैल गाड़ी को बाहर नहीं खींच पा रहे हैं, तो यह देखकर वह परेशान हो गया। यूँकि वह खुद कीचड़ में नहीं उतरना चाहता था इसलिये उसने गाड़ी में बैठे बैठे ही हनुमान जी को पुकारना शुरू कर दिया ।

वह हनुमान जी का भक्त था इसलिये हनुमान जी से इस मुसीबत से उबरने के लिये गुहार लगाने लगा ।

“उसे काफी देर हो गई थी हनुमान जी को पुकारते पुकारते , लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

इस पर उसे गुस्सा आ गया

और वह कहने लगा – इतनी देर से मदद की गुहार लगा रहा हूँ फिर भी हनुमान जी की कृपा मुझ पर नहीं बरसी ।

वहीं पास में एक खेत था उसमे एक किसान हल चला रहा था। वह बहुत देर से यह तमाशा देखा रहा था।

वह उस व्यक्ति के पास आया और बोला – तुम हनुमान जी के भक्त हो न फिर तुम उन्हें क्यों दोष दे रहे हो । तुम खुद कीचड़ में उतरकर जोर क्यों नहीं लगते ? अगर तुम वाकई में हनुमान जी के भक्त हो तो उनके जैसा बनने का प्रयास करो। वह तो समुद्र में उतर गये थे और तुम कीचड़ में भी नहीं उतर सकते ।

जो काम तुम खुद कर सकते हो उसके लिये हनुमान जी को क्यों पुकार रहे हो। इस तरह बैठे बैठे तुम्हारी गाड़ी कीचड़ से पार नहीं हो सकती ।

इतना सब सुनने के बाद गाड़ीवान को अपनी गलती का एहसास हुआ । वह कीचड़ में उतरा और पहियों पर जोर लगाना शुरू कर दिया। धीरे धीरे गाड़ी कीचड़ से पार हो गयी ।

इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि हमें अपना हर काम अपने पुरुषार्थ से करने की कोशिश करनी चाहिये । हर काम  के लिये ईश्वर के भरोसे बैठना कतई भी ठीक नहीं है।

हम ईश्वर से भिखारियों की तरह भीख मंगाते रहते है कि मेरा ये कम करवा दो तो मेरा वो काम करवा दो। जबकि, ईश्वर भी सिर्फ उन्हीं लोगों की मदद करता है जो स्वयं अपनी मदद करना जानते है।

 

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