नारी की व्यथा Hindi speech for Women Empowerment

नारी की व्यथा Hindi speech for Women Empowerment

दोस्तों आप सभी को महिला दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं आज महिला दिवस पर मैंने सोचा कि महिलाओं के बारे में कुछ लिखती हूं क्योंकि मैं खुद एक महिला हूं तो मैं महिलाओं की पीड़ा काफी हद तक समझ सकती हूं ।

मैं ऐसी कई महिलाओं को जानती हूं जो आत्मनिर्भर है नौकरी करती है और ऐसी कई महिलाओं को भी जानती हैं जो घर पर रहती हो और घर के सारे काम संभालती हैं यह दोनों ही तरह की महिलाएं काफी दुविधा में जीती है


 पहले में घरेलू महिलाओं के बारे में बात करूंगी क्योंकि हमारे देश में ज्यादातर महिलाएं घरेलू हैं, जिन्हें हम हाउसवाइफ भी कहते हैं 


इन महिलाओं का कार्य काफी कठिन होता है उनके काम में ना सिर्फ शारीरिक परिश्रम शामिल होता है बल्कि समर्पण भी होता है और जिस समर्पण के साथ वह सुबह से लेकर देर रात तक कार्य करती हैं वह सराहनीय है।


 इनमें से कुछ महिलाएं इसलिए घरेलू होती हैं क्योंकि उनके पति को या उनके परिवार को उनका बाहर काम करना पसंद नहीं होता और कुछ इसलिए घरेलू होती हैं कि उन्हें घर में रहना ही ज्यादा पसंद होता है, और घर के काम करना ही उन्हें अच्छा लगता है ।

वैसे तो घर संभालना ही अपने आप में एक बहुत बड़ा कार्य है लेकिन, ज्यादातर हाउसवाइफ अपने आप को अपेक्षित महसूस करने लगती है या यूं कहें कि परिवार और समाज में उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जो एक नौकरी करने वाली स्त्री को मिलता है।
कई महिलाएं अपने हाउसवाइफ की जॉब से खुश होती हैं उन्हें नहीं लगता कि इससे अच्छा कोई काम उनके लिए नहीं हो सकता है । देखा जाए तो हमारे समाज की व्यवस्था भी इसी प्रकार बनाई गई है पुरुष पैसे कमाने का काम करते हैं और महिलाएं घर संभालने का इसमें कोई बुराई भी नहीं है ।

Hindi speech for Women Empowerment


बुराई की शुरुआत तो तब होती है जब घरेलू महिलाओं को उनके हिस्से का सम्मान प्राप्त नहीं होता कई महिलाएं ऐसी होती है । जिन्हें, सिर्फ घरेलू महिला बनकर रहने के साथ-साथ जीवन में कुछ करने की इच्छा होती है आगे बढ़ने की चाह होती है ऐसी महिलाओं के बाहर जाकर काम करने से न सिर्फ परिवार को मदद मिलती है बल्कि देश की भी उन्नति होती है । 


लेकिन बात फिर वही अटक जाती है ।सम्मान पर, जब घरेलू महिला भी उतनी ही शिक्षित होने के बाद भी सिर्फ खुशी-खुशी घर संभालती है तो उसकी तालीम को कम आंका जाता है परिवार या समाज में लोग उसे इतनी प्राथमिकता नहीं देते ।


तब घरेलू महिला अपना एक स्थान बनाने के लिए पैसे कमाने के बारे में सोचने लगती है परिवार की जरूरत के लिए और अपनी खुशी के लिए पैसे कमाना अलग बात है लेकिन सम्मान पाने के लिए पैसे कमाना अलग बात है 
बस यही हमारे समाज की व्यवस्था बिगड़ने लगती है बहुत मुश्किल होता है घर और बाहर दोनों काम संभालना जबकि घर के अंदर उस महिला की कोई मदद न करता हो । 
अगर घरेलू महिला के कामों को भी घर में सराहा जाए ।उनके भोजन बनाने को भी एक बड़ा काम समझा जाए ।उनकी भावनाओं का घर में पूरा ख्याल रखा जाए जितना संभव हो सके, घर के प्रत्येक व्यक्ति अपने छोटे-छोटे काम स्वयं करें ।
 घर के बड़े निर्णय में उनकी राय मांगी जाए उन्हें उनके खर्च एहसान के तौर पर नहीं हक से दिए जाएं ।
उनका दर्जा घर में पुरुष के बराबर कर दिया जाए, उन्हें मोरल सपोर्ट दिया जाए महत्वपूर्ण मुद्दों पर उन से चर्चा की जाए तो घर स्वर्ग बन सकता है ।

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जो महिलाएं बाहर जाकर काम करती हैं । उन्हें भी हमारा समाज छोड़ता नहीं है । उन्हें भी कई बार जताया जाता है कि वह अपना घर ठीक से नहीं संभाल पा रही है । 
कोई भी महिला घर घर के बाहर जाकर काम तभी कर सकती है जबकि घर के कामों में उसे किसी की मदद मिले अन्यथा जो जो महिलाएं घर और बाहर दोनों काम अच्छे से संभाल भी लेती हैं उनका जीवन एक मशीन से ज्यादा कुछ भी नहीं रह जाता । सारा दिन उनका भागदौड़ में ही निकल जाता है ।

काफी सारी महिलाएं यह भागदौड़ कर लेती है और जो नहीं कर पाती वे कुंठित हो जाती है।न वे अपनी नौकरी छोड़ना चाहती हैं और ना ही अपने घर के कामों को छोड़ना चाहती हैं । ऐसे में वे दुविधा में फंस जाती है कि वह क्या करें ।


शादी से पहले नौकरी करना आसान होता है मगर शादी के बाद बच्चे को संभालते हुए नौकरी करना बहुत मुश्किल होता है मेरे कहने का मतलब वह महिलाएं बहुत ही अच्छी तरीके से समझ जाएंगी जो नौकरी करती है या बिजनेस करती है तब मेरी नजर में सिर्फ एक हल है ।


जिससे महिलाओं को समाज में सम्मान पाने के लिए नौकरी पर ना जाना पड़े । अगर उनकी कुछ बनने की चाह है तो वह बन सकती हैं नौकरी कर सकती हैं लेकिन अगर वह अपने घरेलू महिला होने पर ही खुश हैं, तो वह घरेलू महिला ही बन कर ही रहें।

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इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है महिलाओं का दर्जा घर में पुरुषों के बराबर हो चाहे वह घरेलू महिला हो या पैसे कमाने वाली ।
यदि महिलाओं को हर हाल में उचित सम्मान मिलेगा तो वह सिर्फ तभी पैसे कमाएंगी । जब उनके परिवार को जरूरत हो या उनकी अपनी निजी इच्छा हो ।
बेवजह समाज में सम्मान पाने के लिए कोई भी महिला मशीन की तरह काम करना नहीं चाहेगी।


मेरी नजर में देश की उन्नति के लिए महिलाओं को भी अपनी शिक्षा का उपयोग करना चाहिए । और पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर देश की उन्नति में सहायता करनी चाहिए ।
 ऐसा तभी संभव है जब उनके ऊपर बेवजह कार्यभार ना डाला जाए । प्रत्येक व्यक्ति घर के कामों में उनका हाथ बटाए। और उनके द्वारा किए गए कामों की अहमियत भी समझी जाए। 


देश की उन्नति के लिए अपने परिवार और बच्चों की उन्नति के लिए हमारे देश के हर इंसान को इस मुद्दे पर गहराई से सोचना चाहिए और महिलाओं को प्रेरित करना चाहिए ताकि वे भी अपने सपने पूरे कर सकें ।

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