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ये कौन सा तरीका है जीने का Hindi Poetry On Poverty

ये कौन सा तरीका है जीने का

ये कौन सा तरीका है जीने का Hindi Poetry On Poverty

ये कौन सा तरीका है जीने का Hindi Poetry On Poverty

Hindi Poetry On Poverty

ये कौन सा तरीका है जीने का

मोल होता नहीं गरीब के पसीने का

अमीरों के घर में काम कर करके

 खर्च चलता है क्यूँ महीने का

बनाया सबको एक जैसा है उसने

फर्क आया कहाँ से इस तरह यूँ जीने का

पैसे ने कर दिया छोटा बड़ा यूँ इंसा को

अब कोई काम नहीं

दिल,जज्बात,और करीने का 

 

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