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जो सोच लो वही सब तो सच नहीं होता Hindi Poetry on imagination

 जो सोच लो वही सब तो सच नहीं होता

जो सोच लो वही सब तो सच नहीं होता Hindi Poetry on imagination

जो सोच लो वही सब तो सच नहीं होता Hindi Poetry on imagination

Hindi Poetry on imagination 

दोस्तों

“हमेशा वही सच नहीं होता जो हम सोचते हैं जाने अनजाने हम लोगों को ग़लत समझ लेते हैं या फिर कई लोगों के लिए अपनी एक राय बना लेते हैं कि ये इंसान तो ऐसा ही  है लेकिन ये भी तो सोचिए हर इंसान वक़्त के साथ बदलता रहता है ज़रा सोचिए कि हम ख़ुद पहले से कितना बदल हैं।

हम अपने मन  में ही उलटा सीधा सोचते रहते हैं ऐसा होगा वैसा होगा, हमारे अंदर विचारों का एक सैलाब उठता रहता है। जबकि सच कुछ और ही होता है। “

 

जो सोच लो वही सब तो सच नहीं होता

किसी के दिल में हर पल रब नहीं होता

 

आँखे खोलकर जरा देखो तो इस दुनिया को  

प्यार पाने के लिए रास्ता गलत नहीं होता 

 

कुछ लोग काम करते हैं वक़्त गुजारने खातिर  

हर काम पैसे के लिए हो ऐसा हरगिज़ नहीं होता 

 

खुद के साथ जीना भी  कला है दोस्तों 

जिसे आ गई उसे कभी गम नहीं होता 

 

 आसानी से रिश्ता निभ जाता है  तब

 प्यार में जब  मैं और तुम नहीं होता

 

किसी को चाहने के तरीके बहुत हैं  दोस्तों 

प्यार की मंजिलों में कोई सनम नहीं होता

 

जब खुमारे- ख्वाव  उतरता है इश्क का

तब दिल बहलाने का पैसे में दम नहीं होता 

 

जो सोच लो वही सब तो सच नहीं होता 

किसी के दिल में हर पल रब नहीं होता

 

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Comments

  1. priyanka talekar says:

    ye apki sabse achi poetry hai keep it up waiting for new ones

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