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खुद से खुद की मुलाकात हिंदी कविता Hindi poetry on feeling blessed

खुद से खुद की मुलाकात हिंदी कविता

Hindi poetry on feeling blessed

खुद से खुद की मुलाकात हिंदी कविता Hindi poetry on feeling blessed

खुद से खुद की मुलाकात हिंदी कविता Hindi poetry on feeling blessed

खुद से खुद की हुई है

मुलाकात जब से

अब किसी और की

जरुरत नहीं लगती

 

किसी और से बात

करूँ कैसे

जब खुद से ही

फुर्सत नहीं मिलती

 

जब से देखा है

खुद की कमियों को

अब किसी और की

कमियाँ नहीं दिखती

 

जब से खुद को

मना लिया हमने

जमाने को मनाने

की फितरत नहीं लगती

 

जब से खुद के करीब

आये हैं हम

खुश रहने के लिए वजहों की

जरुरत नहीं लगती

 

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Comments

  1. Nice Poem. इसे पढ़कर कबीरदास जी की याद आ गई। उनके दोहे तो प्रसिद्ध ही है। आपने और अच्छे से समझा दिया।

  2. Thank priyanka

  3. Rohit maurya says:

    Thanks priyanka ji…

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