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एक शोर जो कानों में चलता रहता है Hindi poetry for silence

एक शोर जो कानों में चलता रहता है

Hindi poetry for silence

एक शोर जो कानों में चलता रहता है Hindi poetry for silence

एक शोर जो कानों में चलता रहता है Hindi poetry for silence

एक शोर जो कानों में चलता रहता है

ये शोर अन्दर से ही तो उठता है

 

जहाँ भी जाओ ये शोर हर जगह है

चाहे भीड़ हो या अकेलापन

 

गौर से सुनों ये शोर हर जगह है

अकेले बैठकर इस शोर को सुनो और सोचो

 

ये शोर नहीं ये अन्दर की आवाज़ है शायद

ये शोर नहीं ये शांति है शायद

ये शोर नहीं ये हम है

हममें  खुदा मिला है शायद

 

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Comments

  1. Dheeraj says:

    Hi
    Waqai AAP jo sochti has wo kahi ho raha hota haaa it’s great feeling to read ur thoughts Jazbaat ko sabd mil gaye tcr good bless

  2. Dheeraj says:

    Hi
    What is the thing that inspired u so much that makes ur words so thoughtful
    God bless

  3. Hi dheeraj ji …
    I am watching sandeep maheshwari video on you tube…

    It’s inspire me very much…

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