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स्त्री पुरुष मित्रता हिन्दी कविता Hindi poem on men and woman friendship

स्त्री पुरुष मित्रता हिन्दी कविता

Hindi poem on men and woman friendship

स्त्री पुरुष मित्रता हिन्दी कविता Hindi poem on men and woman friendship

स्त्री पुरुष मित्रता हिन्दी कविता Hindi poem on men and woman friendship

चलो आज मान ही लेती हूँ

नहीं हो सकती कभी भी,

स्त्री पुरूष में स्वस्थ मैत्री –

 

इन संबधों में,

हमेशा आ जाता है।

कुछ लिजलिजापन

कुछ अतृप्त इच्छाये।

दबी दमित वासनाये

नहीं उठ सकता कभी पुरुष

कमल सा कीचड़ में

और स्त्री हो जाती है

कीचड़ सी कमल में

 

परत दर परत – चढ़ी गोंद सी

सामाजिक ग्रंथियाँ

नहीं फ़ूटने देती मैत्री का अंकुर

सब कुछ उसी धुरी पर –

करने लगता है तांडव

 

सारी सभ्यता और संस्कृति

का करके होम

बस यहीं थम जाती है।

सोच की उड़ान

चलो आज मान ही लेती हूँ—-

 

Name: Venus Singh

Profession: Teacher

venus

We are grateful to Venus Singh for sharing this beautiful Poetry with us.

 

 

 

 

 

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Comments

  1. Bahut achchi kavita.

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