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नफरत की आग । Best motivational Hindi Story on hatred

नफरत की आग । Best motivational Hindi Story on hatred

नफरत की आग । Best motivational Hindi Story on hatred

नफरत की आग । Best motivational Hindi Story on hatred

एक राजा थे उनकी एक महात्मा पर बहुत अधिक श्रद्धा थी ।

राजा संत सेवा के महत्त्व को बहुत ही अच्छी तरह जनता था ।

उसने महात्मा जी के रहने के लिये एक महल जो देखने में राजा के महल के समान था ।

एक बहुत बड़ा भवन बनबा दिया|

उसके सामने ही हांथी, घोड़े रथ और सामने एक बगीचे की व्यवस्था भी कर दी।

काम के लिये सेवक नियुक्त कर दिए ताकि महात्मा को कोई परेशानी न हो ।

राजा महात्मा जी के पास रोज जाया करता था ।

जिसकारण वह महात्मा जी से अच्छा घुलमिल गया था ।

अब राजा कभी- कभी महात्मा जी से थोडा बहुत मजाक भी कर लिया करता था ।

एक दिन राजा ने महात्मा जी से पूछ लिया कि हमदोनो के पास समान सुख सुविधाएँ है,

तो हमदोनो एक जैसे हुये हमदोनो में अब कोई अंतर खा रहा ।

महात्मा को ज्ञान हो गया कि राजा को बाह्य जीवन का ही महत्व्व है ।

महात्मा जी ने राजन से कहा कुछ समय का इंतज़ार करो आपको इसका उत्तर मिल जायेगा ।

कुछ दिन बीत गये राजा से मिलने के लिये महात्मा गये तो महात्मा ने राजा से कहा

कि हमारे साथ सैर पर चलिये ।

महात्मा की बात सुनकर राजा ने तुरंत ही हाँ कर दी और दोनों वन की ओर निकल पड़े |

दोनों बातें करते – करते काफी आगे तक निकल गये |

नफरत की आग शिक्षाप्रद  कहानी 

तब महात्मा राजन से बोले हे राजन –

अब इस नगर में लौटने की मेरी इच्छा नहीं है ।

हम दोनों ने सुख और वैभव तो बहुत भोग लिया पर अब मेरी इच्छा है, कि

हम दोनों यही बैठकर भगवान् का भजन करते है ।

राजा चौक गया और तुरंत ही बोला महात्मा जी मेरा राज्य है पत्नी है,पुत्र है।

मैं भला इस वन में कैसे रह सकता हूँ?

महात्मा ने हंसकर जबाब दिया कि राजन मुझमे और आप में बस यही अंतर है । 

बाहर से एक जैसा व्यवहार होते हुये भी असली अंतर अंतर मन की असक्ति का होता है ।

भोगों में जो असक्त होता है वह जंगल में रहकर भी संसारी है ।

जो भोगों में असक्त नहीं है, वह घर में रहकर भी विरक्त है |

अब राजा को यह बात पूरी तरह समझ आ गयी कि आध्यात्म का रास्ता इतना आसान नहीं है ।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आध्यात्म को पाने के लिये हमें बहुत मेहनत करनी पड़ती है ।

 

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