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नारी के सम्मान पर निबंध Best Essay for women in Hindi

नारी के सम्मान पर निबंध Best Essay for women in Hindi

नारी के सम्मान पर निबंध Best Essay for women in Hindi

नारी के सम्मान पर निबंध Best Essay for women in Hindi

 

प्रस्तावना

नारी हमारी धरती की एक आधारशिला है उसके बिना कुछ भी संभव नहीं है, 

उसके अभाव में एक परिवार पूरा नहीं हो सकता है | नारी के कई रूप है |

वह एक पुरुष की माता  भी है, दोस्त भी है, सहयोगिनी भी है, बहन भी है आदि

हमारे भारत में नारी को महिमामय स्थान प्राप्त है

कहते है…

“यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवताः”

इसका मतलब है जहाँ नारियों को पूजा जाता है वहां देवता रमण करते है |

जिस प्रकार वीणा तार के बिना अधूरी है

उसी प्रकार नारी के बिना मानुष जाति और समाज की कल्पना करना भी संभव नहीं है |

 

वैदिक काल :

 

वैदिक काल  में नारी के बिना कोई भी पूजन कार्य संपन्न नहीं होता था

कन्याएं पुत्र के बराबर स्थान रखती थी | नारियों को पढ़ने , लिखने की पूरी सुविधायें थी

उस समय गार्गी और मैत्रयी पैदा हुयी जिनका नाम ऋषियों के साथ आँका जाता था |

इस काल में नारियों को बहुत महत्व्व दिया गया |

 

प्राचीनकाल में नारी का स्थान :

 

प्राचीनकाल में भी नारियां पीछे नहीं रही है

वे घर से लेकर युद्ध क्षेत्र में अपनी कलाएं दिखाती रही है

अतः हम कह सकते है कि इस समय भी नारियों के लिये किसी भी क्षेत्र में रोक टोक नहीं थी|

वैसे नारी का मुख्य कार्य स्थल घर की देखरेख था पर वे घर के साथ-साथ अन्य कार्य भी किया करती थी |

 

नारी के पतन का काल :

 

जब मुस्लिम काल आया तो इस काल में नारी के सम्मान को बड़ा धक्का लगा|

इस काल में नारियों को परदे में रखा जाने लगा अब नारियां भोग और विलास का आधार बन गयी

उनके साथ गलत व्यवहार होने लगा उनकी सारी स्वतंत्रता छीन ली गयी|

 

विरंगनायें :

मुस्लिम युग में भी नारियों ने अपने क़दमों को न रोकते हुये

अपना नाम कमाया इस युग में भी कई वीरांगनायें पैदा हुयी

जैसे पद्मिनी, दुर्गावती, अहिल्या बाई आदि नारियों ने अपनी योग्यता, समझदारी और बलिदान से

भारत में नारियों का स्थान को पीछे न होने दिया

उन्होंने कई यातनायें झेली पर हार नहीं मानी और अपने क्षेत्र में आगे बढ़ गयी |

 

नारी के कुछ विशेष गुण :

नारी बहुत दयालु होती है| वह युद्ध क्षेत्र में कितनी भी खूखार हो

पर जब अपने घर और घरवालों की वारि आती तो उसके अंदर की ममता सबसे आगे होती है |

नारी घर के एक-एक प्राणी का बखूबी ख्याल रखती है

अपने प्यार से सारे रिश्तों को एक माला में पिरोय रहती है|

नारी अपनी मर्यादा, लज्जा, ममता नम्रता के कारण गौरवमयी है |

 

पश्चिमी सभ्यता के नारी पर प्रभाव :

आज की कुछ नारियां पश्चिमी सभ्यता में रंगती जा रही है

जिसकारण वे अपने संस्कार को भूलती जा रही है

अपने कर्ताव्यों से उनकी दूरी बढ़ती जा रही है|

जिसकारण नारियों का विघटन होता जा रहा है | 

 

वर्तमान स्थिति  :

वर्तमान में नारी आर्थिक दृष्टी से स्वतंत्र व शिक्षित हो, पुरुष की गुलामी से मुक्त हो,

और अपना जीवन निर्वाह करे न नारी गुलाम हो न पुरुष गुलाम हो

अति किसी के लिये भी अच्छी नहीं होती है  चाहे वह पुरुष हो या महिला सबको एक बंधन ज़रूरी है

दोनों की समझदारी ही हमारे घर आँगन को सुखी बना सकती है |

दोनों को एकदूसरे का सम्मान करते हुये समाज में आगे बढ़ना चाहिए

इससे जितनी इज्जत नारी को मिलती है उतनी ही इज्जत पुरुष को भी प्राप्त होती है|

वर्तमान में नारी घर भी संभालती है अपने बच्चों का पालन पोषण भी करती है

और और बाहर जाकर पैसे भी कमाती है ताकि पुरुष की घर खर्च में मदद कर सके |

 

उपसंहार   

आज हमारा विश्व युद्धों से घिरा हुआ है हर जगह अशांति के बादल छाये हुये है

ऐसी विषम परिस्थितियों में नारी के अंदर उस गुण की ज़रूरत है जो हमें हमारे संस्कार से मिले है|

नारी सभी के सुख की चाह में वलिदान दे देती है वह ममता और त्याग की मूर्ति है|

वह दानवों का नाश करती है| वह शक्ति रूप है| वह पुरुष को देवत्व की राह दिखाती है |

नारी ने अपने गुणों को हर एक युग में दिखाया है

आज भी वह पुश के कंधे से कन्धा मिलकर दुनियां की भीड़ में पुरुष का साथ दे रही है

अभी भी हमें नारी की प्रगति के लिए बहुत से सोपान जुटाना है ताकि नारी पीछे न रह जाये |

 

 

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