अपना भाग्य खुद बदलें Hindi Story for create future

अपना भाग्य खुद बदलें Hindi  story for create future

अपना भाग्य खुद बदलें Hindi story for create future


अपना भाग्य खुद बदलें Hindi story for create future

बहुत पुरानी बात है। वीरभद्र नाम के एक राजा थे। एक दिन उनके मन में एक सवाल उठा कि जब सबकुछ पहले से निश्चित है, तो हमारे कर्म करने का क्या औचित्य है। जब भाग्य पहले से ही निश्चित है,  तो हमें काम करने की क्या जरुरत है ।

जब उन्हें इन सब प्रश्नों का कोई जबाब नहीं मिला तो उन्होंने यह प्रश्न सभासदों के समक्ष रखा। सभा में कोई भी इसका संतोषजनक जबाब नहीं दे पाया. तभी उनके दरबार में एक चतुर सिंह नामक व्यक्ति ने कहा कि इस सवाल का जबाब उनका मित्र विशाल ही दे सकता है।

महाराज ने विशाल को दरवार में बुलाने को कहा। विशाल को दरवार में बुलाया गया।  विशाल दरबार में उपस्थित हुआ और उसने महाराज को प्रणाम किया।

महाराज ने अपना प्रश्न विशाल के सामने रखा।

विशाल बोला-

महाराज, मेरे विचार मनुष्य भाग्य का दास नहीं है हम अपना भाग्य खुद बना सकते हैं, बदल सकते हैं।

अगर ऐसा होता तो मनुष्य की सारी गतिविधियाँ  यांत्रिक हो जायेंगी। मनुष्य खुद अपने भाग्य का निर्माता है।

महाराज समेत सभी दरबारी विशाल की बात को ध्यान से सुन रहे थे।

विशाल ने आगे कहा कि जब मनुष्य के जीवन में  कोई मुश्किल घड़ी आती है और उसे निर्णय लेना पड़ता है तो वह अपनी इक्षा और विवेक के अनुसार मार्ग चुनने के लिए स्वतन्त्र होता है।

अगर वह कुमार्ग चुनता है तो उसे उसे उसका परिणाम भुगतना पड़ता है। जिस तरह के व्यक्ति कर्म करता उसी तरह का उसका भाग्य बनता है, लेकिन बुद्धिमान और विवेकी व्यक्ति हमेशा सही रास्ता चुनता है बुराई  भले ही उसे कितना भी आकर्षित करे। वह सिर्फ सही रास्ता ही चुनता है. सही रास्ता चुनकर वह उन्नति के पथ का राही बन जाता है।

जो व्यक्ति गलत मार्ग चुनता है उसे उसका परिणाम अवश्य मिलता है। गलत रास्ता भले ही उसे आसान दिख रहा हो मगर उसका परिणाम हमेशा बुरा होता है, ऐसा व्यक्ति हमेशा अपने दोष को छिपाने की कोशिश करता रहता है। अपने आपको सही साबित करने का सबसे आसान उपाय है कि सारा दोष भाग्य को दे दिया जाए और ऐसा व्यक्ति हमेशा यही कहता है कि सारा दोष मेरे भाग्य का है।

परिश्रम, लगन, समर्पण और विवेक से किया गया कार्य हमेशा अच्छा परिणाम देता है।

अपने सवाल का एकदम सही और सटीक उत्तर पाते ही महाराज वीरभद्र बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने विशाल को धन्यवाद कहा और बहुमूल्य उपहार देकर सम्मानित किया उसे अपने दरबार का सदस्य बना लिया।

दोस्तों इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा अपनी मेहनत और स्वयं पर भरोसा रखना चाहिए।

हम अपना भाग्य अपने कर्मों से बनाते है इसलिए हमें हमेशा अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।

इसलिए भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है-

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

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Comments

  1. Inspiring.. Story.. Thanks for sharing di..

  2. Prabhu jaishiya says:

    Really yery good

  3. Aacha article hai.. thanks for sharing

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