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सही आदमी का चयन।बुद्धिमान राजा।Hindi Story on intellectual People

सही आदमी का चयन। बुद्धिमान राजा । Hindi Story on intellectual People

सही आदमी का चयन।बुद्धिमान राजा।Hindi Story on intellectual People

सही आदमी का चयन।बुद्धिमान राजा।Hindi Story on intellectual People

एक बहुत ही  बुद्धिमान राजा था। उस राजा को एक योग्य नौकर की आवश्यकता थी। तब उसने अनेकों लोगों को बुलाया जो नौकर बनना चाहते थे, और उनका परीक्षण किया।

ये परीक्षण उसने इसीलिये किया क्योंकि वह यह बात भली-भांति जानता था कि जिस  नौकर काम करने में बहुत तेज़ होता है।

उसी तरह वह एक खतरनाक आदमी भी होता है, इस कारण परीक्षण करना अत्यंत आवश्यक था।

राजा के दिमाग में एक बात आयी और राजा ने उनमें से केवल तीन आदमीयों को सामने बुलाया और उन तीनों के समक्ष

एक प्रश्न रखा और कहा कि-

अगर कभी कुछ ऐसा हो जाये कि मेरी दाढ़ी और तुम्हारी दाढ़ी दोनों की दाढ़ी में साथ में आग लग जाये तो आप

इस स्थिति में क्या करोगे तब तीनों आदमियों के उत्तर कुछ इसप्रकार थे –

पहले आदमी ने कहा – सरकार मैं पहले आपकी दाढ़ी की आग को बुझाऊंगा बाद में मैं अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊंगा।

दूसरे आदमी ने कहा -मैं अपनी दाढ़ी की पहले और आपकी दाढ़ी की बाद में आग बुझाऊंगा।

अब बचा तीसरा आदमी जिसका उत्तर था बादशाह जी मैं तो एक हाथ से आपकी और दूसरे हाथ से अपनी दाढ़ी की आग

बुझाऊंगा।

 

अब राजा को तीनों के उत्तर मिल चुके थे।

वो जान चुका था कि कौन सबसे सही आदमी है नौकर बनने के लिये तब राजा ने उन तीनों को उत्तर देते हुआ

कहा –

पहले वाले आदमी की बाद से मैं बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ क्यों कि दुनियां में ऐसा कोई आदमी

नहीं है जो अपने में लगी आग को छोड़कर दूसरे की आग को पहले बुझायेगा। मुझे इसकी यह बात पूरी तरह से अव्यवहारिक

लगी। यह तो अज्ञानी भी है। और झूठा भी है ।

 

रही बात अब दूसरे आदमी की तो वह भी नौकर बनने लायक नहीं है क्यों कि दूसरा तो बेहद स्वार्थी इंसान है यह क्या

दूसरों का भला करेगा और अव्यवहारिक भी है। वह कभी किसी का भला नहीं कर सकता है यह तो विश्वास करने के

लायक भी नहीं है न ही यह एक भला आदमी है।

 

अंत में राजा बोला कि तीसरा आदमी मुझे योग्य मालूम पड़ता है यह समझदार भी है, व्यवहारिक

भी है और वह स्वार्थी भी नहीं है वह व्यवहार के धरातल पर जीवित है।

 

राजा ने तीसरे आदमी को नौकर बनाने का फैसला लिया और दोनों आदमियों को वहाँ से वापस कर दिया।

 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने काम के प्रति हमेशा ईमानदारी होना चाहिये क्योंकि

ईमानदारी ही  एक ऐसी वजह है जो हमें हमारे काम में आगे बढ़ने के रास्ते खोलती है । इसीलिये

हमें हमेशा सत्य का मार्ग अपनाना चाहिये।

 

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