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Sant kabeerdasji ke dohe

संत कबीरदास के10 प्रेरणादायक  दोहे

Sant kabeerdasji ke dohe

संत कबीरदास के10 प्रेरणादायक  दोहे Sant kabeerdasji ke dohe

संत कबीरदास के10 प्रेरणादायक दोहे Sant kabeerdasji ke dohe

१ : अति का भला न बोलना, अति की भली न चुप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

अर्थ :  कबीरदास जी कहते हैं न ज्यादा बोलना अच्छा होता है, न ही ज्यादा चुप रहना ही ठीक है, जिसप्रकार बहुत अधिक वर्षा भी  कष्ट देती है और बहुत अधिक धूप भी दुःख देने वाली होती है।

 

२:पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

अर्थ : कबीरदास जी कहते है चाहे कोई कितनी भी बड़ी- बड़ी पुस्तकें पढ़  ले  और चाहे वह संसार का सारा ज्ञान प्राप्त कर ले, लेकिन प्रेम के ढाई अक्षर के ज्ञान के बिना कोई पंडित नहीं बन सकता। जिसने प्रेम के ढाई अक्षर का वास्तविक अर्थ समझ लिया वही सच्चा ज्ञानी है।

 

३ : हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी  मुए, मरम न कोउ जाना।

अर्थ : कबीरदास जी  कहते हैं कि हिन्दू कहते हैं उन्हें राम  प्रिय हैं, मुस्लिम कहते  हैं उन्हें रहमान प्रिय है. इसी बात पर लड़ते -लड़ते  उनकी मृत्यु हो जाती है और वे दोनों ही वास्तविकता में परमात्मा को नहीं पहचान पाते।

 

 

४ : रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।
हीरा जन्म अमोल सा, कोड़ी बदले जाय ॥

अर्थ : कबीरदासजी कहते हैं रात तुमने सोने में व्यतीत कर दी और दिन को खाने में नष्ट कर दिया। हीरे के समान मनुष्य जन्म को तुमने कोड़ी की तरह व्यतीत कर दिया सारे जीवन में कोई भी सार्थक काम नहीं किया।

 

 

५ : दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।

अर्थ : यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह  दूसरों के दोष देखता है, तो वह  हँसता है, उस वक़्त वह अपने दोषों को भूल जाता है, जिनका न आदि है न अंत।

 

६ : दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ॥

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि दुःख के समय सभी भगवान् को याद करते हैं पर सुख में कोई नहीं करता। यदि सुख में भी भगवान् को याद किया जाए तो दुःख हो ही क्यों !

 

७ : काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।
पल में प्रलय होएगी,बहुरि करेगा कब ॥

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि हर काम को कल पर टालने वालों समय के महत्व को पहचानो,  जो कल करना है उसे आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो , कुछ ही समय में जीवन ख़त्म हो जायेगा फिर तुम क्या कर पाओगे।

 

 

8 : तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई

सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होइ

अर्थ : कबीरदासजी कहते हैं। तन से जोगी बनना आसान हैं  तन से सब जोगी बन जाते हैं पर मन को योगी  कुछ बिरले  व्यक्ति ही बना पाते हैं उन्हें सारी सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं जब  मन  योगी बन जाता  है।

 

९ : जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।

अर्थ : कबीरदासजी कहते हैं  जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही लेते  हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ ले कर आता है। लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं, जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते।

 

१० : माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख ।
माँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख ॥

अर्थ : माँगना मरने के बराबर है , इसलिए किसी से भीख मत मांगो। सतगुरु कहते हैं कि मांगने से मर जाना बेहतर है , अर्थात पुरुषार्थ से स्वयं चीजों को प्राप्त करो , उसे किसी से मांगो मत।

 

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