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रस्मोराह निभाना मुश्किल क्यों हो गया है Hindi poetry for relations

Hindi poetry for relations

प्रेरणादायक कवितायें

Hindi poetry for relations प्रेरणादायक कवितायें

Hindi poetry for relations प्रेरणादायक कवितायें

रस्मोराह निभाना मुश्किल क्यों हो गया है

ये ज़माना इतना बुज़दिल क्यों हो गया है

 

जब भी कभी करीब से देखा है किसी भी दिल को

हुआ ये एहसास ये भी कुछ तंगदिल सा हो गया है

 

अपने जो लगते हैं वो अपने ही नहीं

दिखावा अपनेपन का अब कातिल सा हो गया है

 

रास्ते पर साथ चल रहें हैं हमराही भी हैं

मगर साथ  चलना अब मुश्किल सा हो गया है

 

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Comments

  1. “रास्ते पर चल रहे हैं हमराही अब मगर
    साथ चलना भी मुश्किल हो गया है…..!!”
    कविता जी जब साथ चलने वाले वफादार होते हैं तो मजा जिंदगी का कुछ और ही होता है लेकिन जब बेवफाओं से वास्ता पड़ता है तो इस दिल को उनके साथ चलना भी मंजूर नहीं होता है.

    बहुत अच्छे लफ्ज़ लिख डाले हैं आपने. शुक्रिया 🙂

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